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Sunday, June 8, 2025

June 08, 2025

अमरावती शहर: विदर्भ का प्रवेश द्वार - 20 अद्भुत पर्यटन स्थल, Amravati City Top 20 Best Tourist places

 अमरावती शहर: 20 अद्भुत पर्यटन स्थल, Amravati City Top 20 Best Tourist places 

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित अमरावती शहर, इतिहास, आध्यात्मिकता, शिक्षा और प्राकृतिक सौंदर्य का एक अनूठा संगम है। यह शहर अपने प्राचीन मंदिरों, शांत झीलों, शैक्षिक केंद्रों, हरे-भरे उद्यानों और ऐतिहासिक इमारतों के साथ पर्यटकों को आकर्षित करता है। "देवताओं का शहर" के रूप में जाना जाने वाला अमरावती, महाराष्ट्र के पश्चिमी द्वार के रूप में खड़ा है।

चाहे आप आध्यात्मिक शांति की तलाश में हों, इतिहास की खोज करना चाहते हों, या परिवार के साथ एक मजेदार समय बिताना चाहते हों, अमरावती आपको कई विकल्प प्रदान करता है। इस व्यापक मार्गदर्शिका में, हम अमरावती और उसके आसपास के 20 अवश्य घूमने लायक पर्यटन स्थलों के बारे में संक्षिप्त, लेकिन पूरी जानकारी प्रदान कर रहे हैं। प्रत्येक स्थान का महत्व, वहां क्या करना है, कैसे पहुंचना है, प्रवेश शुल्क (यदि लागू हो तो स्पष्ट अनुमान के साथ), और यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय जैसी जानकारी आपकी यात्रा को आसान बनाएगी।

Amravati City Top 20 Best Tourist places


अमरावती शहर में घूमने के लिए 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थल:

1. अंबादेवी मंदिर (Ambadevi Temple)

महत्व: यह अमरावती शहर का सबसे पुराना और पवित्र मंदिर है, जिसके नाम पर ही शहर का नाम पड़ा है। दुर्गा देवी को समर्पित यह मंदिर विदर्भ के महत्वपूर्ण शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। किंवदंती है कि भगवान कृष्ण ने अपनी प्रेमिका रुक्मिणी का अपहरण यहीं से किया था।

क्या करें: दुर्गा देवी के दर्शन करें और प्रार्थना करें। मंदिर की वास्तुकला और शांत वातावरण का आनंद लें। नवरात्रि उत्सव के दौरान यहां विशेष रौनक होती है।

कैसे पहुंचें: शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र में स्थित है। ऑटो, रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं।

प्रवेश शुल्क: कोई नहीं।

यात्रा का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च तक। नवरात्रि (लगभग सितंबर-अक्टूबर) के दौरान विशेष अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

2. एकवीरा देवी मंदिर (Ekvira Devi Temple)

महत्व: अमरावती शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर, पहाड़ियों की तलहटी में स्थित एकवीरा देवी मंदिर, शक्ति देवी के एक अन्य रूप, एकवीरा देवी को समर्पित है। यह मंदिर अपने शांत वातावरण और आसपास की हरियाली के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।

क्या करें: देवी के दर्शन करें और प्रार्थना करें। आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लें।

कैसे पहुंचें: अमरावती बस स्टैंड से स्थानीय बसें या साझा ऑटो उपलब्ध हैं।

प्रवेश शुल्क: कोई नहीं।

यात्रा का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च तक। मानसून (जुलाई-सितंबर) में आसपास का क्षेत्र और भी हरा-भरा और सुंदर होता है।

3. वडाली तालाब (Wadali Talav)

महत्व: अमरावती शहर में स्थित एक सुंदर कृत्रिम झील है। यह स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए आराम करने, शाम बिताने और विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों के लिए एक लोकप्रिय स्थान है। झील के चारों ओर अच्छी तरह से रखरखाव वाले हरे-भरे पार्क, पैदल मार्ग और नौकायन की सुविधा है।

क्या करें: झील में नौकायन का आनंद लें (पैडल बोट और मोटर बोट)। झील के चारों ओर पैदल मार्गों पर जॉगिंग या आराम से टहलें। शाम को ताजी हवा का आनंद लेते हुए समय बिताएं।

कैसे पहुंचें: अमरावती शहर के भीतर ही मुख्य क्षेत्र में स्थित है। ऑटो, रिक्शा, कैब आसानी से उपलब्ध हैं।

प्रवेश शुल्क: झील के चारों ओर चलने के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। नौकायन के लिए नाममात्र का शुल्क (लगभग रु. 50-100 प्रति व्यक्ति 30 मिनट के लिए, नाव के प्रकार के आधार पर भिन्न होता है) लगता है।

यात्रा का सर्वोत्तम समय: पूरे साल, खासकर शाम को (शाम 4 बजे - 7 बजे) मौसम सुहावना होता है।

4. छत्री तालाब (Chhatri Talab)

महत्व: वडाली तालाब के पास स्थित एक और महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक झील है। इस झील के चारों ओर कई ऐतिहासिक संरचनाएं और छोटे मंदिर हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को बढ़ाते हैं। यह वडाली तालाब जितना व्यस्त नहीं है, इसलिए अधिक शांत वातावरण प्रदान करता है।

क्या करें: झील के चारों ओर टहलें। ऐतिहासिक संरचनाओं और मंदिरों का अन्वेषण करें।

कैसे पहुंचें: अमरावती शहर में वडाली तालाब के करीब स्थित है। ऑटो, रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं।

प्रवेश शुल्क: कोई नहीं।

यात्रा का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च तक।

5. गुरुकुंज आश्रम (Gurukunj Ashram), मोजारी

महत्व: अमरावती शहर से लगभग 20-25 किलोमीटर दूर स्थित गुरुकुंज आश्रम, प्रसिद्ध संत, दार्शनिक और समाज सुधारक राष्ट्रीय संत तुकड़ोजी महाराज की पवित्र समाधि (समाधि स्थल) है। यह महाराष्ट्र के कोने-कोने से लाखों भक्तों को आकर्षित करने वाला एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र है। आश्रम में एक संग्रहालय भी है जो राष्ट्रीय संत तुकड़ोजी महाराज के जीवन और शिक्षाओं को दर्शाता है।

क्या करें: समाधि के दर्शन करें और प्रार्थना करें। आश्रम के शांत वातावरण और संग्रहालय का अन्वेषण करें।

कैसे पहुंचें: अमरावती सेंट्रल बस स्टैंड से मोजारी के लिए सीधी बसें या निजी टैक्सी उपलब्ध हैं।

प्रवेश शुल्क: कोई नहीं।

यात्रा का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च तक। राष्ट्रीय संत तुकड़ोजी महाराज की जयंती और पुण्यतिथि (विशेषकर अक्टूबर के अंत/नवंबर की शुरुआत में) के दौरान विशेष कार्यक्रम और उत्सव होते हैं।

6. महामृत्युंजय मंदिर (Mahamrityunjay Temple)

महत्व: अमरावती शहर में स्थित एक प्रमुख शिव मंदिर है, जो लोगों की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर शिव भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है। महाशिवरात्रि और अन्य पवित्र दिनों में यह मंदिर भक्तों से खचाखच भरा रहता है।

क्या करें: शिवजी के दर्शन करें और प्रार्थना करें। मंदिर परिसर में कुछ देर शांति से बैठें।

कैसे पहुंचें: अमरावती शहर में आसानी से पहुंचा जा सकता है। ऑटो, रिक्शा उपलब्ध हैं।

प्रवेश शुल्क: कोई नहीं।

यात्रा का सर्वोत्तम समय: पूरे साल, खासकर महाशिवरात्रि और श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में।

Monday, June 2, 2025

June 02, 2025

महाराष्ट्र में ऐतिहासिक रामटेक मंदिर: पवित्रता, शांति और अद्भुत सौंदर्य का धाम Best Tourist Place In Nagpur District Ramtek Gad Mandir

 महाराष्ट्र में ऐतिहासिक रामटेक मंदिर: पवित्रता, शांति और अद्भुत सौंदर्य का धाम Best Tourist Place In Nagpur District Ramtek Gad Mandir 

महाराष्ट्र के नागपुर जिले में स्थित रामटेक शहर इतिहास, आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर एक शांत जगह है। इस क्षेत्र का प्रसिद्ध रामटेक मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह रामायण काल की प्राचीन गाथाओं से जुड़ा एक पवित्र स्थान भी है। स्थानीय रूप से इसे "रामटेक गढ़ मंदिर" भी कहा जाता है, जहाँ "गढ़" का अर्थ 'किला' है। यह मंदिर एक छोटी पहाड़ी पर बने किले के भीतर स्थित है, जो श्रद्धालुओं को न केवल आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है, बल्कि आसपास की प्रकृति के अद्भुत दृश्यों का भी आनंद देता है। नागपुर के करीब स्थित यह ऐतिहासिक स्थल, समय के साथ अपनी प्रासंगिकता बनाए रखते हुए, भक्तों और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है।

Best Tourist Place In Nagpur District Ramtek Gad Mandir


रामटेक: नाम के पीछे की पौराणिक कथाएँ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

रामटेक नाम के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है, जो सीधे भगवान श्री राम से जुड़ी है। "राम" का अर्थ भगवान श्री राम है, और "टेक" का अर्थ 'संकल्प' या 'प्रतिज्ञा' है। इस नाम का एक मजबूत पौराणिक आधार है।

रामायण से जुड़ाव:

पौराणिक कथाओं के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान श्री राम, देवी सीता और लक्ष्मण के साथ भारत के विभिन्न हिस्सों में विचरण कर रहे थे। ऐसा दृढ़ता से माना जाता है कि उस दौरान उन्होंने वर्तमान रामटेक क्षेत्र में कुछ समय विश्राम किया था। यह क्षेत्र उस समय घने दंडकारण्य का हिस्सा था।

इस स्थान के आध्यात्मिक महत्व का मूल अगस्त्य ऋषि का आश्रम है। उस समय, दंडकारण्य क्षेत्र में रहने वाले ऋषि-मुनि राक्षसों के उपद्रव से बहुत पीड़ित थे। राक्षस उनके यज्ञों और तपस्याओं को भंग करते थे। अगस्त्य ऋषि ने भगवान श्री राम से भेंट की और उनसे इन राक्षसों के प्रकोप से संसार को बचाने की प्रार्थना की। ऐसा माना जाता है कि तब भगवान श्री राम ने इसी पवित्र भूमि पर राक्षसों का संहार कर धर्म को पुनः स्थापित करने का संकल्प (टेक) लिया था। इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम "रामटेक" पड़ा, ऐसा स्थानीय लोग और इतिहासकार मानते हैं। इस स्थान को "संकल्प स्थल" भी कहा जाता है।

ऐतिहासिक निर्माण और शासक:

वर्तमान में हम जिस रामटेक मंदिर को देखते हैं, उसका निर्माण और जीर्णोद्धार ऐतिहासिक महत्व रखता है। इस मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में नागपुर के मराठा शासक रघुजी भोंसले द्वारा किया गया था। भोंसले राजवंश का महाराष्ट्र के इतिहास में एक प्रमुख स्थान है और उन्होंने कला, वास्तुकला और धार्मिक स्थलों को बढ़ावा दिया। ऐसा माना जाता है कि इससे पहले भी यहाँ एक मंदिर था, और रघुजी भोंसले ने उसका जीर्णोद्धार और विस्तार करके उसे वर्तमान स्वरूप दिया। इस मंदिर की वास्तुकला मराठा शैली को दर्शाती है, जो अपने समय की इंजीनियरिंग कौशल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

महाकवि कालिदास से जुड़ाव:

इस स्थान का महत्व केवल रामायण तक ही सीमित नहीं है। भारत के महान कवि और नाटककार महाकवि कालिदास ने अपनी प्रसिद्ध कृति "मेघदूतम्" इसी रामटेक की पहाड़ियों में लिखी थी, ऐसा माना जाता है। मेघदूतम् एक यक्ष की कहानी है जो अपनी प्रियतमा को संदेश भेजने के लिए एक बादल को दूत बनाता है। ऐसा विश्वास है कि कालिदास ने इस स्थान के शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता से प्रेरणा लेकर अपनी रचना की। यह रामटेक को केवल एक आध्यात्मिक केंद्र नहीं, बल्कि एक महान सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल भी बनाता है।

रामटेक मंदिर: वास्तुकला, आध्यात्मिक विशेषताएँ और देवता

रामटेक मंदिर की वास्तुकला इसके इतिहास और आध्यात्मिकता का दर्पण है। यह मंदिर एक छोटी पहाड़ी पर बना है, इसलिए ऊपर तक पहुँचने के लिए कई सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। इन सीढ़ियों को चढ़ते समय, आसपास का शांत वातावरण और हरियाली मन को प्रसन्न करती है। मंदिर एक किले के भीतर स्थित है, जो कभी एक रक्षात्मक किलेबंदी के रूप में कार्य करता था। किले की दीवारें मजबूत हैं और प्राचीन वास्तुकला शैली का प्रदर्शन करती हैं।

Sunday, May 25, 2025

May 25, 2025

रामप्पा मंदिर एक वास्तुशिल्प चमत्कार और तेलंगाना का गौरव : world heritage site Ramappa Temple

 रामप्पा मंदिर एक वास्तुशिल्प चमत्कार और तेलंगाना का गौरव : World Heritage site Ramappa Temple 

परिचय
भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है। इस विशाल देश के हर कोने में अनगिनत मंदिर, किले और स्मारक हैं जो समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। इन्हीं में से एक अद्भुत रत्न है तेलंगाना के पालमपेट गाँव में स्थित रामप्पा मंदिर। यह मंदिर न केवल अपनी अद्वितीय सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद इसने वैश्विक पहचान भी हासिल की है। यह लेख रामप्पा मंदिर के इतिहास, वास्तुकला, महत्व और इसे देखने के लिए यात्रा संबंधी जानकारी पर विस्तृत प्रकाश डालेगा।
रामप्पा मंदिर का इतिहास: काकतीय राजवंश की विरासत
रामप्पा मंदिर, जिसे रुद्रेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, काकतीय राजवंश के गौरवशाली अतीत का एक जीवंत प्रमाण है। इस मंदिर का निर्माण काकतीय शासक गणपति देव के शासनकाल के दौरान 1213 ईस्वी में शुरू हुआ था। मंदिर का निर्माण उनके प्रधान सेनापति रेचरला रुद्र रेड्डी ने करवाया था। सबसे असाधारण बात यह है कि इस मंदिर का नाम इसके मूर्तिकार, रामप्पा के नाम पर रखा गया है। यह अपने आप में एक दुर्लभ सम्मान है, क्योंकि भारतीय मंदिरों का नाम आमतौर पर देवताओं या उन्हें बनाने वाले शासकों के नाम पर रखा जाता है। यह इस बात का प्रमाण है कि मूर्तिकार रामप्पा का कौशल और कला कितनी असाधारण रही होगी कि उनके काम को स्वयं उनके नाम से पहचाना गया।

World Heritage site Ramappa Temple


काकतीय राजवंश 12वीं और 13वीं शताब्दी में दक्कन क्षेत्र में एक शक्तिशाली साम्राज्य था। उनकी राजधानी वारंगल थी, और उन्होंने कला, वास्तुकला और साहित्य को संरक्षण दिया। रामप्पा मंदिर का निर्माण काकतीय वास्तुकला शैली की परिपक्वता को दर्शाता है, जो अपनी सटीकता, जटिल नक्काशी और टिकाऊपन के लिए जानी जाती है।
रामप्पा मंदिर की वास्तुकला: एक इंजीनियरिंग चमत्कार
रामप्पा मंदिर की वास्तुकला किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह काकतीय शिल्पकारों की इंजीनियरिंग कौशल और कलात्मक दूरदर्शिता का एक शानदार उदाहरण है। मंदिर एक विशाल परिसर में स्थित है, और इसका मुख्य आकर्षण इसकी अद्वितीय संरचना और जटिल नक्काशी है।
तेरमेरित रेत तकनीक (Floating Brick Technology): रामप्पा मंदिर की सबसे अनूठी विशेषताओं में से एक इसकी नींव में इस्तेमाल की गई "तेरमेरित रेत" तकनीक है। मंदिर की नींव रेत के एक गहरे गड्ढे में रखी गई थी, जो भूकंप के झटके को अवशोषित करने में मदद करती है। इससे मंदिर को सदियों तक बिना किसी बड़े नुकसान के खड़ा रहने में मदद मिली है। इसके अलावा, मंदिर के शिखर में ऐसी ईंटों का उपयोग किया गया है जो पानी में तैरती हैं। यह हल्की ईंटें मंदिर के भार को कम करती हैं और इसे संरचनात्मक रूप से मजबूत बनाती हैं। यह उस समय के इंजीनियरों और वास्तुकारों की असाधारण समझ को दर्शाता है।

Saturday, April 5, 2025

April 05, 2025

केदारनाथ मंदिर उत्तराखण्ड पर्यटन स्थल: best tourist place in uttarakand

 

केदारनाथ पर्यटन स्थल: एक आध्यात्मिक और प्राकृतिक चमत्कार की पूरी जानकारी : best tourist place in uttarakand

केदारनाथ, उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित, भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यह हिमालय की गोद में बसा एक ऐसा स्थान है जो न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच के लिए भी प्रसिद्ध है। केदारनाथ मंदिर, जो भगवान शिव को समर्पित है, बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और चार धाम यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक इस पवित्र स्थल की यात्रा करते हैं ताकि आध्यात्मिक शांति प्राप्त कर सकें और हिमालय की अनुपम सुंदरता का आनंद ले सकें। इस लेख में हम केदारनाथ पर्यटन स्थल के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे, जिसमें इतिहास,



धार्मिक महत्व, यात्रा का समय, कैसे पहुंचें, आसपास के दर्शनीय स्थल, और बहुत कुछ शामिल है।

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केदारनाथ का परिचय: एक पवित्र और प्राकृतिक नगीना

केदारनाथ 3,583 मीटर (11,755 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है और मंदाकिनी नदी के उद्गम के पास बसा हुआ है। यह स्थान चार धाम यात्रा (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, और यमुनोत्री) का सबसे दुर्गम और शांतिपूर्ण स्थल माना जाता है। चारों ओर बर्फ से ढके हिमालय के शिखर, शांत वातावरण, और प्राचीन मंदिर इस जगह को एक अनोखा आकर्षण प्रदान करते हैं। केदारनाथ का नाम "केदार" (शिव का एक नाम) और "नाथ" (स्वामी) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है "खेतों का स्वामी।" यह स्थान न केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ट्रेकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक स्वर्ग है।

केदारनाथ मंदिर की स्थापना का श्रेय पांडवों को दिया जाता है, जिन्होंने महाभारत के युद्ध के बाद भगवान शिव से क्षमा मांगने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था। बाद में, 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया। यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है।

केदारनाथ का धार्मिक महत्व

केदारनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में बहुत ऊंचा है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो भगवान शिव के सबसे पवित्र रूपों को दर्शाता है। इसके अलावा, यह पंच केदार (केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर, और कल्पेश्वर) में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की शरण में गए। शिव ने बैल के रूप में छिपने की कोशिश की, लेकिन पांडवों ने उन्हें पहचान लिया। जब भीम ने बैल को पकड़ने की कोशिश की, तो शिव जमीन में समा गए और उनके शरीर के विभिन्न हिस्से अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए। केदारनाथ में उनकी पीठ (हंप) प्रकट हुई, जिसे आज ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है।

यह भी माना जाता है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर के गर्भगृह में एक त्रिकोणीय पत्थर को शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है, जो इस स्थान की पवित्रता को और बढ़ाता है।

केदारनाथ यात्रा का सबसे अच्छा समय

केदारनाथ की यात्रा का सबसे अच्छा समय अप्रैल से नवंबर के बीच होता है, क्योंकि इस दौरान मंदिर आम जनता के लिए खुला रहता है। सर्दियों में (नवंबर से अप्रैल) भारी बर्फबारी के कारण मंदिर बंद रहता है, और भगवान की मूर्ति को उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में ले जाया जाता है। यहाँ मौसम की स्थिति इस प्रकार है:

  • अप्रैल-जून (गर्मी): यह समय यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त है। मौसम सुहावना रहता है, तापमान 15°C से 30°C के बीच रहता है, और ट्रेकिंग के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल होती हैं।
  • जुलाई-सितंबर (मानसून): इस दौरान भारी बारिश होती है, जिससे भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा रहता है। मानसून में यात्रा से बचना चाहिए।
  • अक्टूबर-नवंबर (शरद ऋतु): मौसम ठंडा होने लगता है, लेकिन दृश्यता अच्छी रहती है। यह समय भी यात्रा के लिए ठीक है।

सर्दियों में केदारनाथ पूरी तरह बर्फ से ढक जाता है, जो इसे एक खूबसूरत लेकिन दुर्गम स्थान बना देता है।